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मोनिका / मधुप मोहता
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| मुखपृष्ठ » | रचनाकारों की सूची » | रचनाकार: मधुप मोहता | » संग्रह: समय, सपना और तुम |
इंद्रधनुष
किसी पीले पड़े सूरज का
भ्रम भर है,
यदि हमारी आंखें देख पातीं
तो हर सच अपने असली
रंग में नज़र आता।
सपना
एक सच है
जो बीत जाने के,
बाद जिया जाता है।
अगर हम जागते रहते तो
तो हर ख़्वाहिश, अपने ज़ाहिर होने भर से,
पूरी हो जाती।
संगीत टूटी-फूटी ख़ामोशी के
टुकड़े हैं
अगर हम सुन सकते
तो हर ख़ामोशी
हमारी धड़कन की धुन पर
गुनगुनाती।
फूल,
एक याद है,
ख़ुशबुओं के बेफ्रिक
होकर नाचने की,
अगर हम याद भर करते
तो हर ख़ुशबु
हमें अपनीे बेचैन बांहों में
समेट लेती।
दिया,
एक इशारा भर है
रोशनी का,
जो हमें परछाइयों
में बांधती है।
अगर हम खोलते आंखें,
तो हर किरण,
हमें मख़मली अंधेरों की बांहों में
लुभा लेती।
कविताएं
वायदा भर हैं
दर्द का
अगर हम पढ़ सकते
तो हर अक्षर लिखता
आंसुओं की इबारत।