भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मौत आएगी और आँखों पर छा जाएगी / चेज़ारे पावेज़े

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 00:29, 3 अक्टूबर 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार= चेज़ारे पावेज़े |अनुवादक=राकेश क...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मृत्यु आएगी और तुम्हारी
आँखों पर छा जाएगी
यह मृत्यु
जो सुबह से शाम तक
हमारे साथ चलती हैं

बिना विश्राम, बिना सुने,
जैसे एक पुराना पश्चाताप
या एक भारी पाप

तुम्हारी आँखें एक अनकहा शब्द,
एक अनसुनी चिल्लाहट
एक ख़ामोशी बन जाएँगी।
इस तरह तुम इन्हें रोज़ सुबह देखते हो।

जब तुम झुककर ख़द को अकेले शीशे में देखोगे
हे प्रिय आशा ! उस दिन
हमें भी पता चल जायगा
कि तू ज़िन्दगी हैं और तू कुछ भी नहीं हैं

सब लोगों के लिए मृत्यु के
पास एक नजरिया हैं
मृत्यु आएगी
और तुम्हारी आँखों पर छा जाएगी

ऐसा लगेगा कि जैसे
एक पाप पर अंकुश लगाना
जैसे कि शीशे में मृत चेहरे को
फिर से उभरते देखना
जैसे शिथिल पड़े होठों को फिर से सुनना
हम शान्त भँवर में उतर जाएँगे।

मृत्यु आएगी
और तुम्हारी
आँखों पर छा जाएगी

अँग्रेज़ी से अनुवाद : राकेश कुमार