भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मौसम की आनाकानी / निर्मल शुक्ल

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:49, 15 फ़रवरी 2011 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=निर्मल शुक्ल |संग्रह= }} {{KKCatNavgeet}} <poem> चिंगारी से शर्…)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चिंगारी से शर्त लगी है
आंधी से तकरार नहीं है

नहीं पसीजीं
गर्म हवाएँ
रेत हो गए घर सपनों के
एक दूसरे के
कांधों पर
रो लेते हैं सर अपनों के

झंझावातों से अठखेली
करने का त्यौहार नहीं है

है मौसम की
आनाकानी
उतर गए ऋतुओं के तार
हँसकर पतझड़
छेड़ गया है
मधुमासों के साज-सँवार

सुर्ख़ हो गई धवल चाँदनी
लेकिन चीख़-पुकार नहीं है

इतने पर भी
कानों में कुछ
दे जाती संवाद दिशाएँ
दूर कहीं इस
उठापटक में
होंगी फिर अनुरक्त ऋचाएँ

स्थिति अब इन चिकनी-चुपड़ी
बातों को तैयार नहीं है