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यो कस्तो रात / राममान तृषित

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यो कस्तो रात दियो बदला मुटु जल्छ
यो के वर्षा लिई आगो हावा चल्छ
यो कस्तो रात………………..

कति पिडा कति आशु नशाले नै छुन्न कि जस्तो
अँध्यारो के अँध्यारो यो बिहान नै हुन्न कि जस्तो
यो कस्तो रात ……………..

उनी आउलिन् उनी अाईनन प्रतिक्ष नै सिता जस्तो
जताततै उनैको गीत गुन्जिने शून्यता कस्तो
यो कस्तो रात ……………….