भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
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रसखान
Kavita Kosh से
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रसखान www.kavitakosh.org/raskhan | |||
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आपके पास चित्र उपलब्ध है? कृपया kavitakosh AT gmail DOT com पर भेजें जन्म: 1541 अनुमानित
निधन: 1603 अनुमानित
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| उपनाम | रसखान | ||
| जन्म स्थान | दिल्ली | ||
| कुछ प्रमुख कृतियाँ | -- | ||
| विविध | |||
| जीवनी | रसखान / परिचय | ||
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Raskhan, Ras Khan | |||
- मंगलाचरण/ रसखान
- प्रेमवाटिका / रसखान (दोहा-गुटका)
- सुजान रसखान / रसखान (कविता-संग्रह)
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- मानुस हौं तो वही / रसखान
- या लकुटी अरु कामरिया / रसखान
- सेस गनेस महेस दिनेस / रसखान
- धूरि भरे अति सोहत स्याम जू / रसखान
- कानन दै अँगुरी रहिहौं / रसखान
- मोरपखा मुरली बनमाल / रसखान
- कर कानन कुंडल मोरपखा / रसखान
- मोरपखा सिर ऊपर राखिहौं / रसखान
- गावैं गुनी गनिका गन्धर्व / रसखान
- संकर से सुर जाहिं जपैं / रसखान
- प्रान वही जु रहैं रिझि वापर / रसखान
- रसखान के दोहे / रसखान
- आवत है वन ते मनमोहन / रसखान
- जा दिनतें निरख्यौ नँद-नंदन / रसखान
- बैन वही उनकौ गुन गाइ / रसखान
- सोहत है चँदवा सिर मोर को / रसखान
- कान्ह भये बस बाँसुरी के / रसखान
- नैन लख्यो जब कुंजन तैं / रसखान
- फागुन लाग्यौ सखि जब तें / रसखान
- मोहन हो-हो, हो-हो होरी / रसखान
- गोरी बाल थोरी वैस, लाल पै गुलाल मूठि / रसखान
- खेलत फाग सुहाग भरी / रसखान
- ब्रह्म मैं ढूँढयो पुराण गानन / रसखान
- जेहि बिनु जाने कछुहि नहिं / रसखान
- आयो हुतो नियरे रसखानि / रसखान
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| भक्तिकालीन रचनाकार | भक्तिकाल क्या है | ||
| ज्ञानाश्रयी शाखा | कबीर । रैदास । मलूकदास | ![]() |
| प्रेमाश्रयी शाखा | मलिक मोहम्मद जायसी | |
| कृष्णाश्रयी शाखा | सूरदास । नंददास । कृष्णदास । परमानंददास । कुम्भनदास । चतुर्भुजदास । छीतस्वामी । गोविन्दस्वामी । मीराबाई । नरोत्तमदास । रहीम । रसखान । विद्यापति | |
| रामाश्रयी शाखा | तुलसीदास | |
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