भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

राजबाला नै ब्याह देगा अपणी मान बड़ाई कर कै / मेहर सिंह

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 13:15, 11 फ़रवरी 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=मेहर सिंह |अनुवादक= |संग्रह= }} {{KKCatHaryan...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कह दिये क्यूं भूल गया मेरी सगाई कर कै।
राजबाला नै ब्याह देगा अपणी मान बड़ाई कर कै।टेक

धूम जमाना देख लिया इस में कुण किस का सै
बखत पड़े पै धोरा धरज्यां जो कुणबा जिस का सै
मित्र मेली गोती नाती यो मतलब आपस का सै
प्रताप सिंह से कह दिये के टोटा किस के बस का सै
इस ब्याह का खर्चा चला ल्यूं अपणी नेक कमाई कर कै।

समय करै नर के कर ले समय आवणी जाणी
किस समय मैं राजा थे पर डोब गई बेईमानी
ईसा खजाना लुट्या पिता नै खो दिन्ही जिन्दगानी
पिछली बात याद करकै आख्यां मैं आग्या पाणी
झूपड़ी मैं बैठ गया अजीत समाई कर कै।

तनै रजपुतां की मुंछ काटली के महाराणा बण रह्या सै
दुनियां मैं तेरी बांस उठली क्यूं स्याणा बण रह्या सै
देशलपुर नै मरण की खातिर खुद जाणा बण रह्या सै
किस कै आगै रोऊं जाकै धिंगताणा बण रह्या सै
बेईमान रोवैगा पाछै लोग हंसाई कर कै।

पैसा हो तै पैसे के संग हो से बनड़ी ब्याहली
पैसे आले की दुनियां में हौ सै शान निराली
पैसा हो तै यार भतैरे ना तै फिरै गाल मैं ठाली
बिन पैसे बिन ल्हाज जगत मैं हो सै बुरी कंगाली
कहै जाट मेहर सिंह बट्टा ना लागै म्हारे अस्नाई करकै।