Last modified on 14 जुलाई 2015, at 17:32

लेहु हजमा सुबरन कसैलिया / मगही

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

लेहु[1] हजमा सुबरन कसैलिया[2] नेवतियो[3] लावऽ चारो धाम हे।
गया से नेवतिहऽ[4] गजाधर[5] नेवतिहऽ, नेवतिहऽ बीर हनुमान हे।
गंगा में नेवतिहऽ गंगा मइया नेवतिहऽ, नेवतिहऽ सीरी जगरनाथ[6] हे।
धरती से नेवतिहऽ सेसरनाथ[7] हे॥1॥
गाा से अयलन[8] गजाधर अयलन, अयलन सीरी जगरनाथ हे।
गंगा से गंगा मइया अयलन, अयलन बीर हनुमान हे।
धरती से अयलन सेसरनाथ हे॥2॥

शब्दार्थ
  1. लो
  2. सोने की सुपारी
  3. निमंत्रण दे आओ
  4. निमंत्रण दे आओ
  5. गजाधर भगवान
  6. जगन्नाथ
  7. शेषनाग
  8. आये