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शहर / लैंग्स्टन ह्यूज़ / उज्ज्वल भट्टाचार्य

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शहर सुबह-सुबह
फैला देता है अपने डैने
पत्थरों से निचोड़ता है एक गीत
और गाता है ।

शाम को वही शहर
सोने चला जाता है,
उसके सिर के ऊपर
लटकती हैं बत्तियाँ ।

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : उज्ज्वल भट्टाचार्य