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शाकू से विदा / एज़रा पाउंड / एम० एस० पटेल

”शाकू के राजा, सान्सो ने सड़कें बनवाईं”

वे कहा करते हैं सान्सो की सड़कें बहुत ढालु हैं,
पहाड़ों जैसी खड़ी हैं ।
आदमी के चेहरे पर दीवारें उठती हैं,
पहाड़ी से बादल उठते हैं उसके घोड़े की लगाम पर ।
मधुर वृक्ष शिन के बनाए रास्ते पर हैं,
खड़ंजे से उन के तने फूटते हैं,
शाकू के मध्य, वैभवशाली नगर में
नदियाँ बाढ़ का बर्फ़ गला रही हैं
मानव नियति पूर्व निर्धारित है,
सगुनियों से पूछने की ज़रूरत नहीं है ।

मूल अँग्रेज़ी से अनुवाद : एम० एस० पटेल

लीजिए अब मूल अँग्रेज़ी में यही कविता पढ़िए
                Ezra Pound
      Leave-Taking Near Shoku

They say the roads of Sanso are steep,
Sheer as the mountains.
The walls rise in a man's face,
Clouds grow out of the hill
at his horse's bridle.
Sweet trees are on the paved way of the Shin,
Their trunks burst through the paving,
And freshets are bursting their ice
in the midst of Shoku, a proud city.
Men's fates are already set,
There is no need of asking diviners.