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संग चलूँगी उड़ने जहाज में / ब्रजभाषा

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

वारे लाँगुरिया संग चलूँगी उड़ने जहाज में,
कोई बैठूँ ना मोटर कार॥ टेक॥
वारे लाँगुरिया वा दिन गयौ तू भूलिकै,
कोई लिख-2 भेजे तैंने तार॥ 2॥
वारे लाँगुरिया अब न आऊँ तेरे फन्दे में,
कोई लीजो सोच विचार॥ 3॥
वारे लाँगुरिया वायदे तिहारे झूठे पड़ि रहे,
अब है गई हूँ मैं हुशियार॥ 4॥
वारे लाँगुरिया ‘प्रभु’ तौ बिठावै उड़ने जाहज में,
वोई बेड़ा लगावे पल्लीपार॥ 5॥