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"संस्कृतम् सदा सेवनीयम् / सत्यनारायण पांडेय" के अवतरणों में अंतर

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संस्कृम् सर्वदा सेवनीयं जनैः
संस्कृते सन्निहितास्माकं संस्कतिः
संस्कृम् बिना संस्कृर्नैव नः स्यात्
अतः संस्कृम् रक्षणीयं सदा।

वेदादि आदिमग्रन्थादिकम्
उपनिषद् पुराणानि
रामायण महाभारतादिकम्
नीतिनिर्धारकमनुस्मृत्यादिकम्
सर्वे संस्कृतैव सम्पादितम्
षोडश संस्कारादिकृत्याः
संस्कृतैव सम्पादितम्
अतः संस्कृम् सदा सेवनीयं जनैः।

कालिदास्य भारवेःमाघस्य वा
काव्यानिसंस्कृते गुम्फिता
संस्कृतज्ञानं बिना तेषां
रसास्वादनं कथं स्यात्
अतः संस्कृम् सदा सेवनीयं जनैः।

संस्कतस्य प्रभावात्सदा सम्पदम्
यत्र कुत्राऽपि नगरे ग्रामे
वा संस्कृम् बिना जीवनं कथं भो
जीवनो संस्कृम् श्वसनं संस्कृम्
अतः संस्कृम् सदा सेवनीयं जनैः।