भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

संस्कृत मातु: आरती / शास्त्री नित्यगोपाल कटारे

Kavita Kosh से
Pratishtha (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 01:33, 19 अप्रैल 2011 का अवतरण

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

 ॐ जय संस्कृत मातः देवि! जय संस्कृत मातः
 नित्यं वयं भजामः त्वां सायं प्रातः।।ॐ जय....

 देवास्तव महिमानं सर्व गीतवन्तः।
 कालिदास वाल्मीकिः व्यासादिक सन्ताः।।ॐ जय .....

 पाणिनि कात्यायिन पतञ्जलिः मुनि सेवित चरणा।
 सन्धि समासालंकृता त्रयष्षष्ठि वर्णा।।ॐ जय ....

 प्रत्ययोपसर्गावृत शोभितांगवस्त्रैः।
 नश्यति तिमिरान्धत्वं षट्कारक शस्त्रैः।।ॐ जय ....

 त्वं सद् ज्ञान स्वरूपा त्वं भारत धात्री।
 कामधेनुरिव मातः सत्पदार्थ दात्री।।ॐ जय ....

 यस्त्वामाराधयते किल पवित्र मनसा।
 लभते फलमभीप्सितं कर्मणा च वचसा।।ॐ जय ...

 ॐ प्रणवस्य प्रभावं येनाप्यनुभूतम् ।
 अमृत पदमाप्नोति न पश्यति यमदूतम्।।ॐ जय ....

 गायति नित्यगोपालः तव ध्यानं कृत्वा।
 अहर्निशं सेविष्ये जित्वाऽपि च मृत्वा।।ॐ जय ...