भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

सत्ता का विकेन्द्रीकरण / देवी प्रसाद मिश्र

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 16:05, 1 फ़रवरी 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार= देवी प्रसाद मिश्र |अनुवादक= |संग्...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गृहमंत्री इस बात से ख़ुश थे कि पुलिस प्रमुख ने बहुत नावाजिब किस्म की क्रूरता दिखाई जो
इस बात से प्रसन्न था कि एस० पी० ने कम क्रूरता नहीं दिखाई
जो इस बात से ख़ुश था कि डी० एस० पी० ने अप्रतिम संवेदनहीनता दिखाई जो इस बात से भरा-भरा था कि
इंस्पेक्टर ने शर्मिंदा कर देने वाला वहशीपन दिखाया
जो इस बात से मुतमइन था कि सब इंस्पेक्टर ने दिल दहला देने वाली हिंसा का मुज़ाहिरा किया
जो कांस्टेबल की क्रूरता से अत्यन्त सन्तुष्ट था।

तो इस पहेली का जवाब मिलता दिख रहा है कि
चौराहे पर हिलते नामामूलम सिपाही में गृहमंत्रियों के चातुर्य
उनकी अपारदर्शिताएँ, आत्ममुग्धताएँ, दबंगई, क्रूरताएँ, मक्कारियाँ
एक साथ क्यों पाए जाते हैं।