भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

समय से भिड़ने के लिए / सरोज परमार

Kavita Kosh से
218.248.67.35 (चर्चा) द्वारा परिवर्तित 17:42, 29 जनवरी 2009 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=सरोज परमार |संग्रह=समय से भिड़ने के लिये / सरोज प...)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मौसम में उमस है
हवा में साज़िशें
फ़िज़ा में घुल गया वहशियाना रंग
मन की हरियाली को
निगल रहा अकेला पन
समय से भिड़ने के लिए
जो शब्द जुटाए थे
बामशक्कत बचाए थे
उन्हें पैना करो
कल जब सपने टँग जाएँगे
सलीब पर
शब्द की धार ही
काटेगी हवा को.