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सरहद से लौटते हुए / मनोहर बाथम
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अनिल जनविजय (वार्ता | योगदान)ने किया हुवा 17:00, 23 मार्च 2009का अवतरण
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तुम अपनी सरहद को
पाक कहते हो
मैं भी
दोनों की है यह एक
यह प्यार करना नहीं सिखाती
माँ की तरह
बाँटती है
हरदम सोचता हूँ मैं
सरहद से लोटते हुए