भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

स्‍वेच्‍छा से किए जाने वाले सात काम तथा एक बग़ावती हरकत / निकानोर पार्रा / श्रीकान्त दुबे

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 05:04, 1 जनवरी 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=निकानोर पार्रा |अनुवादक=श्रीकान...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

1.

कवि किसी झील में पत्थर फेंक
वृत्ताकार अपकेन्द्री लहरों को जन्म दे

2.

कवि एक कुर्सी का सहारा ले ऊपर उठे
और लटकने वाली घड़ी की रस्सी बन जाए

3.

गीतकार-कवि फूलों से लदे चेरी वृक्ष के समक्ष
घुटनों के बल बैठ जाए
और ईश्वर की प्रार्थना का गायन शुरू कर दे

4.

कवि गोताखोर की पोशाक धारण कर ले
और पार्क के बीच किसी पोखर में गोते लगाए

5.

कवि छाते की मूठ थामे
दिएगो पोर्तालेस टॉवर के अन्तिम माले से
हवा में छलाँग लगा दे

6.

कवि निविड़ एकान्त के स्तूप में अपनी मोर्चाबन्दी कर ले
और वहीं से चलाए राहगीरों पर ज़हर बुझे तीर

7.
अभिशप्त कवि
पत्थरों से परिन्दे उड़ा अपना मन बहलाए

बगावती हरक़त

कवि अपने वतन के प्रति कृतज्ञता स्वरूप
अपनी शिराएँ काट डाले।

मूल स्पानी भाषा से अनुवाद : श्रीकान्त दुबे