भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हँसी / हैरॉल्ड पिंटर

Kavita Kosh से
Eklavya (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 05:39, 6 फ़रवरी 2009 का अवतरण

यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हँसी थम जाती है पर कभी नहीं होती खत्म
हँसी झुठाने में लगा देती है अपना पूरा दम
हँसी हँसती है उस पर जो है अनकहा हर दम
ये झरती है और किकयाती है और रिसती है दिमाग़ में
ये झरती है और किकयाती है लाशों के दिमाग़ों में
और इस तरह सारे झूठ हँसते हुए जाते हैं जम
जिन्हें सोख लेती है सिर कटी लाशों की हँसी बेदम
जिन्हें सोख लेते हैं हँसती लाशों के मुँह हर कदम

मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल एकलव्य