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हमारी उम्रें गुज़र चुकेंगी, न तुम रहोगे न हम रहेंगे / अमित गोस्वामी

हमारी उम्रें गुज़र चुकेंगी, न तुम रहोगे न हम रहेंगे
फ़िज़ा में, अफ़लाक1 पर, हवा में मगर ये क़िस्से रक़म2 रहेंगे

जो नक़्श−ए−माज़ी3 तुम्हारी यादों ने खेंच रक्खें हैं लौह−ए−दिल4 पर
छुपा तो लूँगा जो तुम कहो, पर निशान ये सौ जनम रहेंगे

किताब−ए−माज़ी के बीच तुमने छुपा के रक्खें हैं उन ख़तों के
वरक़5 अगर सूख भी गए तो, हुरूफ़5 अश्कों से नम रहेंगे

वो रंग−ए−तसवीर हो कि मौज़ू सुख़न का हो, या हों साज़ के सुर
मैं चाहे कोई ज़बान बोलूँ, लबों पे दर्द−ओ−अलम रहेंगे

हमेशा ताज़ा रहेगी मेरी ग़ज़ल की ख़ुशबू कि इसमें तेरी
अदा की शोख़ी, नज़र के पैमाने, ज़ुल्फ़ के पेच−ओ−ख़म6 रहेंगे


1. आसमानों 2.लिखे हुए 3.अतीत के चिन्ह 4.दिल का काग़ज़ 5.अक्षर 6.घुमाव