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"हे मेरी तुम !.. / केदारनाथ अग्रवाल" के अवतरणों में अंतर

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हे मेरी तुम !
 
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बिना तुम्हारे--
 
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जलता तो है
 
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दीपक मेरा
 
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लेकिन ऐसे
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जैसे आँसू
 
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की यमुना पर
 
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छोटा-सा
 
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खद्योत
 
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टिमकता,
 
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क्षण में जलता
 
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क्षण में बुझता ।
 
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11:07, 15 अप्रैल 2011 के समय का अवतरण

हे मेरी तुम !
बिना तुम्हारे--

जलता तो है
दीपक मेरा
लेकिन ऐसे

जैसे आँसू
की यमुना पर
छोटा-सा
खद्योत
टिमकता,

क्षण में जलता
क्षण में बुझता ।