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हे लठ्याली तू कैकी बौराण छ? / गढ़वाली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

हे लठ्याली[1] तू कैकी बौराण छ?
धुँवाँ-सी धुपली[2], पाणी सी पतली,
केला-सी गलखी, नौण[3]-सी गुँदगी,
दिवा जसी जोत, कैकी बौराण छ?
इनी मेरी होंदी जिकुड़ी[4] मा सेंदी[5]
बादल सी झड़ी, दूबला[6] सी लड़ी,
भीमल सी सेटकी[7] लाबू[8] सी-ठेलकी,
फ्यूँली[9] की-सी कली, कैकी बौराण छ?
नाक मा छ तोता, जीभ मा क्वील,
आँख्यों माआग, गालू मा गुलाब।
हुड़की-सी कमर, कैकी बौराण छ?
इनी मेरी होंदी, हथगुली मा[10] सेन्दी।
बाँदू[11] मा की बाँद चाँदू मा की चाँद।
चीणा[12] जसी झम[13], पालिंगा[14] सी डाली।
हिंसर की-सी डाली, कैकी बौराण छ?
घास काटद काटद, बणी छ गितांग[15]
हे लठ्याली दादू, कैकी बौराण छ?

शब्दार्थ
  1. आली
  2. महीन
  3. मक्खन
  4. हृदय
  5. सौती
  6. दूब
  7. छड़ी
  8. पत्ता
  9. एक सुन्दर फूल
  10. हथेली
  11. सुन्दरी
  12. एक प्रकार का अनाज
  13. बाली
  14. पालक
  15. गवैया