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चित्र:Rekhankan-star-48x48.pngरेखांकित रचना: मृदुल कीर्ति द्वारा काव्यानुवादित रचना धन्याष्टकं
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  रेखांकित रचनाकार
शमशेर बहादुर सिंह का जन्म मुजफ्फरनगर के एलम ग्राम में हुआ। शिक्षा देहरादून तथा प्रयाग में हुई। प्रयोगवाद और नई कविता के कवियों की प्रथम पंक्ति में इनका स्थान है। इनकी शैली अंग्रेजी कवि एजरा पाउण्ड से प्रभावित है। इनके मुख्य काव्य संग्रह हैं- 'कुछ कविताएँ', 'कुछ और कविताएँ', 'इतने पास अपने', 'चुका भी नहीं हूँ मैं', 'बात बोलेगी', 'उदिता' तथा 'काल तुझसे होड है मेरी'। ये कबीर सम्मान तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए।
 सप्ताह की कविता   शीर्षक : जो मिरा इक महबूब है
  रचनाकार: अरुणा राय
जो मिरा इक महबूब है । मत पूछिए क्या ख़ूब है 
आँखें उसकी काली हँसी, दो डग चले बस डूब है 
पकड़ उसकी सख़्त है  पर छूना उसका दूब है 
हैं पाँव उसके चंचल बहुत, रूकें तो पाहन बाख़ूब हैं

जो मिरा इक महबूब है । मत पूछिए क्या ख़ूब है....
  एक काव्य मोती : मुनव्वर राना

जब कभी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती
है

कविता कोश में मुनव्वर राना

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